- कवि: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) — खड़ी बोली के प्रमुख कवि, “दद्दा” उपनाम।
- रचना का प्रकार: कविता (संवाद-शैली में) — माँ और बालक के बीच प्रेमपूर्ण वार्तालाप।
- मुख्य पात्र: नन्हा बालक (राहुल) और उसकी माँ (यशोधरा) — आधार महात्मा बुद्ध की कथा।
- केंद्रीय भाव: माँ की ममता, बालक की जिज्ञासा, कहानी सुनने की मासूम जिद, और गृह-त्याग की करुण व्यथा।
- भाषा: सरल, मधुर खड़ी बोली; प्रवाहमयी एवं संगीतमय।
- विशेषता: कविता ‘साकेत’ जैसी शैली में लयबद्ध संवाद के रूप में रची गई है।
- परीक्षा भार: ~5 अंक — भावार्थ, शब्दार्थ, काव्य-सौंदर्य एवं कवि-परिचय के प्रश्न।
- पाठ्यपुस्तक: NCERT मल्हार, कक्षा 7, प्रथम अध्याय।
1. कवि परिचय — मैथिलीशरण गुप्त
जन्म: 3 अगस्त 1886, चिरगाँव (झाँसी, उत्तर प्रदेश)। निधन: 12 दिसंबर 1964।
मैथिलीशरण गुप्त को “राष्ट्रकवि” की उपाधि से सम्मानित किया गया। वे खड़ी बोली हिंदी के सर्वप्रथम महान कवियों में से एक हैं। उनकी कविता में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, नारी-गरिमा और मानवीय करुणा के स्वर प्रमुख रूप से सुनाई देते हैं।
- प्रमुख रचनाएँ: साकेत, यशोधरा, भारत-भारती, पंचवटी, जयद्रथ-वध, द्वापर।
- भाषा-शैली: सरल, प्रवाहमयी एवं मधुर खड़ी बोली; भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति।
- विशेषता: उन्होंने नारी-पात्रों (यशोधरा, उर्मिला, कैकेयी) की वेदना को बड़ी संवेदनशीलता से उभारा।
- सम्मान: ‘भारत-भारती’ ने राष्ट्रीय जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई; उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
यह कविता “माँ, कह एक कहानी” उनकी प्रसिद्ध कृति की शैली में रची गई है, जिसमें वे महात्मा बुद्ध (तब राजकुमार सिद्धार्थ) की पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल के बीच का कोमल संवाद प्रस्तुत करते हैं।
2. कविता का सार
इस कविता में एक नन्हा बालक अपनी माँ से कहानी सुनाने की जिद करता है। बालक की मासूम जिद और माँ का स्नेहपूर्ण उत्तर — यही कविता का मूल आधार है। बालक कहता है — “माँ, एक कहानी कहो।” वह तरह-तरह से माँ को मनाता है और कहानी के बारे में अनेक प्रश्न पूछता है।
माँ कहानी सुनाने लगती है। वह बताती है कि एक राजकुमार था, जिसका सुंदर उपवन (बगीचा) था और वहाँ एक बड़ा सरोवर भी था। उस सरोवर में सुनहरे और सुगंधित कमल खिले थे। राजकुमार बहुत सुखी जीवन बिता रहा था। परंतु एक दिन आकाश में उड़ते हुए हंसों का झुंड दिखाई दिया। उन्हीं में से एक हंस तीर लगने से घायल होकर नीचे गिर पड़ा।
जैसे ही माँ कहानी के इस मोड़ पर पहुँचती है — जहाँ राजकुमार के मन में दूसरों के दुख के प्रति करुणा जागती है — तो माँ का स्वर भावुक हो जाता है। यह कथा वास्तव में राजकुमार सिद्धार्थ (बाद के गौतम बुद्ध) की है। बालक की जिज्ञासा और माँ की ममता के बीच कविता समाप्त होती है, और संकेत मिलता है कि यही राजकुमार आगे चलकर सब कुछ त्यागकर सत्य की खोज में निकल पड़ेगा। माँ (यशोधरा) के मन में पति के गृह-त्याग की पीड़ा भी छिपी हुई है।
3. भावार्थ (मुख्य अंशों का अर्थ)
(क) बालक की जिद
नन्हा बालक रोते-मचलते हुए माँ से एक कहानी सुनाने की प्रार्थना करता है। वह कहता है — माँ, बस एक कहानी कह दो। बालक की यह जिद उसकी मासूमियत और जिज्ञासा को दर्शाती है। बच्चों की दुनिया में कहानियाँ ही सबसे बड़ा आनंद होती हैं, और माँ की गोद ही उनके लिए सबसे सुरक्षित स्थान है।
(ख) माँ का प्रश्न और बालक के उत्तर
माँ पूछती है — कौन-सी कहानी सुनाऊँ? बालक भोलेपन से कहता है कि वह राजा-रानी, राजकुमार, उपवन और सरोवर वाली कहानी सुनना चाहता है। बालक के मन में सुंदर दृश्यों की कल्पना भरी है। यह संवाद माँ-बेटे के बीच के कोमल और प्रेमपूर्ण संबंध को सजीव कर देता है।
(ग) कहानी का दृश्य — उपवन और सरोवर
माँ बताती है — एक राजकुमार था। उसका विशाल और सुंदर उपवन था। उस उपवन में एक स्वच्छ सरोवर था जिसमें सोने जैसे चमकते कमल खिले थे। चारों ओर हरियाली, फूलों की सुगंध और पक्षियों का कलरव था। यह वर्णन कविता में चित्रात्मक सौंदर्य भर देता है।
(घ) घायल हंस का प्रसंग
एक दिन आकाश में हंसों का झुंड उड़ रहा था। तभी एक तीर लगने से एक हंस घायल होकर सरोवर के पास गिर पड़ा। राजकुमार ने उस घायल हंस को उठा लिया, उसकी सेवा की और उसके घाव पर मरहम लगाया। राजकुमार के हृदय में दूसरों के दुख के प्रति करुणा और दया का भाव जाग उठा। यही करुणा आगे चलकर उसे महात्मा बुद्ध बनाएगी।
(ङ) माँ की छिपी वेदना
कहानी सुनाते-सुनाते माँ (यशोधरा) भावुक हो जाती है, क्योंकि यह कथा उसके अपने जीवन से जुड़ी है। उसका पति (सिद्धार्थ) इसी करुणा के कारण घर छोड़कर चला गया था। इस प्रकार कविता में बालक की मासूम खुशी और माँ की मौन पीड़ा — दोनों भाव साथ-साथ चलते हैं।
4. काव्य-सौंदर्य (भाषा एवं शिल्प)
- संवाद-शैली: पूरी कविता माँ और बालक के संवाद के रूप में लिखी गई है, जिससे यह जीवंत और स्वाभाविक लगती है।
- सरल खड़ी बोली: भाषा अत्यंत सरल, मधुर और प्रवाहमयी है, जिसे बच्चे भी आसानी से समझ सकते हैं।
- चित्रात्मकता: उपवन, सरोवर, सुनहरे कमल और उड़ते हंसों का वर्णन आँखों के सामने चित्र खींच देता है।
- करुण रस: घायल हंस और माँ की छिपी वेदना के प्रसंग में करुण रस की प्रधानता है।
- वात्सल्य भाव: माँ का बालक के प्रति स्नेह वात्सल्य रस को जन्म देता है।
- लयबद्धता: कविता में सुंदर तुक और लय है, जिससे यह गेय (गाने योग्य) बन जाती है।
- प्रतीकात्मकता: घायल हंस दुख-पीड़ित संसार का प्रतीक है, और राजकुमार की करुणा मानवता का प्रतीक है।
5. कविता का केंद्रीय संदेश
(क) माँ-बच्चे का प्रेम: कविता माँ और संतान के बीच के अटूट, कोमल संबंध को दर्शाती है। माँ की गोद बालक के लिए सबसे प्यारी जगह है।
(ख) जिज्ञासा का महत्व: बालक की कहानी सुनने की चाह उसकी सहज जिज्ञासा और कल्पनाशीलता को उभारती है, जो बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है।
(ग) करुणा का संदेश: घायल हंस की रक्षा का प्रसंग बताता है कि दूसरों के दुख में सहायता करना ही सच्ची मनुष्यता है।
(घ) त्याग और महानता: राजकुमार सिद्धार्थ की कथा यह संकेत देती है कि महान आत्माएँ संसार के दुख से विचलित होकर सत्य की खोज में निकल पड़ती हैं।
6. कठिन शब्द और उनके अर्थ
| शब्द | अर्थ |
| उपवन | बगीचा / बाग |
| सरोवर | तालाब / झील |
| हंस | एक सुंदर श्वेत जलपक्षी |
| करुणा | दया / दूसरों के दुख पर द्रवित होना |
| वात्सल्य | संतान के प्रति माता-पिता का स्नेह |
| मचलना | जिद करना / रूठकर माँगना |
| कलरव | पक्षियों की मधुर आवाज़ |
| मरहम | घाव पर लगाने की औषधि |
| वेदना | पीड़ा / दुख |
| गृह-त्याग | घर-परिवार को छोड़ देना |
| सान्निध्य | निकटता / साथ |
| जिज्ञासा | जानने की इच्छा |
7. महत्वपूर्ण प्रश्न (उत्तर सहित)
उत्तर: बालक माँ से बार-बार “एक कहानी कहो” की जिद करता है। ऐसा वह अपनी सहज जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और माँ के स्नेहपूर्ण साथ की चाह के कारण करता है। कहानियाँ बच्चों के लिए आनंद और कल्पना का सबसे बड़ा स्रोत होती हैं, और माँ की गोद में बैठकर कहानी सुनना उसे सुरक्षा एवं प्रेम का अनुभव कराता है।
उत्तर: कविता में राजकुमार सिद्धार्थ (बाद के महात्मा गौतम बुद्ध) की कथा का संकेत है। घायल हंस की रक्षा का प्रसंग उनके करुणामय हृदय को दर्शाता है, जिसके कारण आगे चलकर वे संसार के दुखों को समझकर सत्य की खोज में घर छोड़ देते हैं।
उत्तर: घायल हंस का प्रसंग यह संदेश देता है कि दूसरों के दुख को समझना और उनकी सहायता करना ही सच्ची मनुष्यता है। राजकुमार ने घायल हंस को उठाकर उसकी सेवा की — यही करुणा सबसे बड़ा मानवीय गुण है।
उत्तर: कहानी सुनाते समय माँ (यशोधरा) भावुक हो जाती है, क्योंकि यह कथा उसके अपने जीवन से जुड़ी है। उसका पति इसी करुणा के कारण घर छोड़कर चला गया था। बालक की मासूम खुशी के पीछे माँ की मौन पीड़ा छिपी है — यही कविता का करुण पक्ष है।
उत्तर: (i) संवाद-शैली — पूरी कविता माँ और बालक की बातचीत के रूप में है, जिससे वह जीवंत लगती है। (ii) सरल, मधुर खड़ी बोली एवं चित्रात्मकता — उपवन, सरोवर और हंसों का वर्णन आँखों के सामने चित्र खींच देता है तथा भाषा गेय एवं लयबद्ध है।
- सूरदास
- मैथिलीशरण गुप्त
- तुलसीदास
- रामधारी सिंह दिनकर
- महाकवि
- राष्ट्रकवि
- कविरत्न
- कलम का सिपाही
- खिलौना
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- राजकुमार सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध)
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- सुंदर सरोवर और कमल
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- उसे छोड़ दिया
- उसे उठाकर सेवा की और मरहम लगाया
- उसे पकाकर खा लिया
- उसे बेच दिया
- क्रोध
- करुणा / दया
- लोभ
- भय
- तालाब
- बगीचा
- पहाड़
- नदी
- उसे नींद आ रही थी
- यह कथा उसके अपने जीवन से जुड़ी है
- उसे कहानी याद नहीं थी
- बालक रो रहा था
- वीर रस
- हास्य रस
- वात्सल्य एवं करुण रस
- शृंगार रस
- क्रोध
- संतान के प्रति माता-पिता का स्नेह
- भय
- घृणा
- कठिन संस्कृतनिष्ठ
- सरल, मधुर खड़ी बोली
- अवधी
- ब्रजभाषा
- धन कमाना जरूरी है
- माँ-बच्चे का प्रेम और करुणा की महत्ता
- युद्ध करना चाहिए
- पशुओं को पालना लाभदायक है
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