फूल और काँटा

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CLASS VII Hindi ~5 अंक Ch 3 of 10
फूल और काँटा

Class 7 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नज़र में
  • कवि: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) — खड़ी बोली के प्रमुख कवि।
  • रचना का प्रकार: नीति-प्रधान कविता (Didactic Poem) — प्रतीकों के माध्यम से जीवन-शिक्षा।
  • मुख्य प्रतीक: एक ही पौधे पर उगने वाले ‘फूल’ और ‘काँटे’ — दो विपरीत स्वभाव।
  • केंद्रीय भाव: ऊँचा कुल या स्थान महत्वपूर्ण नहीं; व्यक्ति की पहचान उसके अच्छे कर्मों एवं स्वभाव से होती है।
  • शिक्षा: विनम्रता, परोपकार एवं मधुर स्वभाव श्रेष्ठ है; घमंड और दूसरों को कष्ट देना निंदनीय है।
  • भाषा: सरल, प्रवाहमयी खड़ी बोली; प्रतीकात्मक एवं उपदेशात्मक।
  • परीक्षा भार: ~5 अंक — भावार्थ, काव्य-सौंदर्य, शिक्षा एवं शब्दार्थ के प्रश्न।
  • पाठ्यपुस्तक: NCERT मल्हार, कक्षा 7, तृतीय अध्याय।
विस्तृत नोट्स

1. कवि परिचय — अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

जन्म: 1865, निज़ामाबाद (आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश)। निधन: 1947। उपनाम — ‘हरिऔध’।

अयोध्यासिंह उपाध्याय हिंदी के एक प्रमुख कवि एवं साहित्यकार थे। वे खड़ी बोली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में नीति, उपदेश, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सुधार के भाव प्रमुख हैं।

  • प्रमुख रचनाएँ: प्रियप्रवास (खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य), वैदेही वनवास, चोखे चौपदे, चुभते चौपदे।
  • विशेषता: ‘प्रियप्रवास’ खड़ी बोली में रचित पहला महाकाव्य माना जाता है।
  • शैली: सरल, प्रवाहमयी एवं उपदेशात्मक; प्रतीकों के माध्यम से जीवन-मूल्यों की शिक्षा।

“फूल और काँटा” उनकी एक प्रसिद्ध नीति-प्रधान कविता है, जिसमें वे फूल और काँटे के प्रतीक से जीवन का गहरा संदेश देते हैं।

2. कविता का सार

इस कविता में कवि एक ही पौधे (या डाली) पर उगने वाले फूल और काँटे के स्वभाव की तुलना करते हैं। दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं, एक ही जड़ से पोषण पाते हैं, एक ही माली उनकी देखभाल करता है, और एक ही चाँदनी एवं ओस उन पर पड़ती है। फिर भी दोनों का स्वभाव और व्यवहार बिल्कुल अलग है।

काँटा घमंडी और कठोर स्वभाव का है। वह दूसरों को चुभता है, कष्ट देता है, कपड़े फाड़ देता है और किसी के काम नहीं आता। उसका स्वभाव दुख देने वाला है। इसके विपरीत, फूल कोमल, सुगंधित और परोपकारी है। वह अपनी सुगंध और सुंदरता से सबको आनंद देता है। वह देवताओं पर चढ़ाया जाता है, लोगों के सिर पर सजता है और माला बनकर सम्मान पाता है।

कवि कहते हैं कि दोनों का जन्म एक ही स्थान पर हुआ, फिर भी फूल को सब प्यार करते हैं और काँटे से सब दूर रहते हैं। इसका कारण है — उनका स्वभाव और कर्म। कवि का संदेश है कि ऊँचा कुल या स्थान बड़ा नहीं बनाता; व्यक्ति अपने अच्छे गुणों और कर्मों से ही महान बनता है।

3. भावार्थ (मुख्य भावों का अर्थ)

(क) एक ही जगह, एक जैसा पोषण

फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे पर, एक ही डाली पर उगते हैं। दोनों को एक ही माली सींचता है, एक ही जड़ से रस मिलता है और एक जैसी हवा, धूप, चाँदनी और ओस मिलती है। अर्थात् दोनों की परिस्थितियाँ बिल्कुल समान हैं।

मुख्य भाव: एक जैसी परिस्थिति और पालन-पोषण पाकर भी दो व्यक्ति अपने स्वभाव के कारण भिन्न हो जाते हैं।

(ख) काँटे का कठोर स्वभाव

काँटा घमंडी और दुष्ट स्वभाव का है। वह जिसके पास आता है, उसे चुभता है, उसके कपड़े फाड़ देता है और दूसरों को कष्ट पहुँचाता है। वह किसी के काम नहीं आता और सबसे घृणा एवं तिरस्कार पाता है। काँटा दुर्जन (बुरे व्यक्ति) का प्रतीक है।

(ग) फूल का कोमल एवं परोपकारी स्वभाव

फूल कोमल, सुंदर और सुगंधित है। वह बिना भेदभाव के सबको अपनी सुगंध और सुंदरता बाँटता है। वह देवताओं के चरणों में चढ़ता है, राजाओं-महलों में शोभा पाता है और माला बनकर सम्मान का पात्र बनता है। फूल सज्जन (अच्छे व्यक्ति) का प्रतीक है।

(घ) कवि का संदेश

कवि कहते हैं कि बड़प्पन जन्म या ऊँचे स्थान से नहीं आता, बल्कि अच्छे कर्मों और मधुर स्वभाव से आता है। फूल ऊँचाई पर खिलने के कारण नहीं, बल्कि अपने परोपकारी गुणों के कारण पूजनीय है। मनुष्य को भी काँटे की तरह घमंडी और कष्टदायी न बनकर, फूल की तरह विनम्र, कोमल और परोपकारी बनना चाहिए।

संदेश: “ऊँचे कुल में जन्म लेना बड़ा नहीं बनाता; मनुष्य अपने सद्गुणों और परोपकार से ही महान बनता है।”

4. प्रतीकात्मक अर्थ

प्रतीक अर्थ
फूलसज्जन / विनम्र, परोपकारी और मधुर स्वभाव का व्यक्ति
काँटादुर्जन / घमंडी, कठोर और दूसरों को कष्ट देने वाला व्यक्ति
एक ही पौधा / जड़समान परिस्थिति एवं पालन-पोषण
मालीपालने-पोषने वाला (समाज / प्रकृति)
सुगंध / सुंदरताअच्छे गुण एवं परोपकार

इस प्रकार पूरी कविता प्रतीकों के माध्यम से यह सिखाती है कि व्यक्ति की पहचान उसके स्वभाव और कर्म से होती है, न कि उसके जन्म-स्थान या कुल से।

5. काव्य-सौंदर्य (भाषा एवं शिल्प)

  • प्रतीकात्मकता: फूल और काँटा सज्जन तथा दुर्जन के प्रतीक हैं — यही कविता का मूल सौंदर्य है।
  • तुलनात्मक शैली: कवि दो विपरीत स्वभावों की तुलना करके अपना संदेश प्रभावशाली ढंग से देते हैं।
  • सरल खड़ी बोली: भाषा सरल, प्रवाहमयी एवं सुबोध है।
  • उपदेशात्मकता: कविता नीति एवं जीवन-मूल्यों की शिक्षा देती है।
  • मानवीकरण: फूल और काँटे को मानवीय स्वभाव (घमंड, विनम्रता) से युक्त दिखाया गया है।
  • लयबद्धता: कविता में सुंदर तुक और लय है, जिससे यह सरलता से याद रह जाती है।

6. कठिन शब्द और उनके अर्थ

शब्द अर्थ
काँटापौधे का नुकीला कठोर भाग जो चुभता है
सुगंधअच्छी महक / खुशबू
मालीबगीचे की देखभाल करने वाला
सज्जनअच्छा एवं भला व्यक्ति
दुर्जनबुरा / दुष्ट व्यक्ति
परोपकारदूसरों की भलाई करना
कोमलमुलायम / नाजुक
कठोरसख़्त / निर्दयी
तिरस्कारअनादर / उपेक्षा
कुलवंश / परिवार
सद्गुणअच्छे गुण
ओसरात में जमने वाली पानी की बूँदें

7. महत्वपूर्ण प्रश्न (उत्तर सहित)

प्रश्न 1. फूल और काँटा कहाँ उगते हैं?

उत्तर: फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे (डाली) पर उगते हैं। दोनों को एक ही माली सींचता है, एक ही जड़ से पोषण मिलता है और एक जैसी हवा, धूप, चाँदनी एवं ओस मिलती है। अर्थात् दोनों की परिस्थितियाँ बिल्कुल समान हैं, फिर भी उनका स्वभाव भिन्न है।

प्रश्न 2. काँटे और फूल के स्वभाव में क्या अंतर है?

उत्तर: काँटा घमंडी और कठोर स्वभाव का है; वह दूसरों को चुभता है, कष्ट देता है और किसी के काम नहीं आता। इसके विपरीत, फूल कोमल, सुगंधित और परोपकारी है; वह अपनी सुगंध एवं सुंदरता से सबको आनंद देता है और सम्मान पाता है। काँटा दुर्जन का तथा फूल सज्जन का प्रतीक है।

प्रश्न 3. कविता का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: कविता का मुख्य संदेश है कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके जन्म, कुल या ऊँचे स्थान से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्मों और मधुर स्वभाव से तय होता है। मनुष्य को काँटे की तरह घमंडी एवं कष्टदायी न बनकर, फूल की तरह विनम्र, कोमल और परोपकारी बनना चाहिए।

प्रश्न 4. फूल को सब प्यार क्यों करते हैं?

उत्तर: फूल को सब इसलिए प्यार करते हैं क्योंकि वह कोमल, सुंदर एवं सुगंधित है और बिना भेदभाव के सबको आनंद देता है। वह देवताओं पर चढ़ता है, माला बनकर सम्मान पाता है और सबका मन मोह लेता है। उसका परोपकारी एवं मधुर स्वभाव ही उसे सबका प्रिय बनाता है।

प्रश्न 5. कविता की काव्य-शैली की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: (i) प्रतीकात्मकता — फूल और काँटा सज्जन तथा दुर्जन के प्रतीक हैं, जिससे कविता गहरा अर्थ देती है। (ii) तुलनात्मक एवं उपदेशात्मक शैली — कवि दो विपरीत स्वभावों की तुलना करके सरल खड़ी बोली में जीवन-मूल्य की शिक्षा देते हैं।

अभ्यास प्रश्न (बहुविकल्पीय)
1. “फूल और काँटा” कविता के कवि कौन हैं?
  1. मैथिलीशरण गुप्त
  2. अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
  3. सुमित्रानंदन पंत
  4. महादेवी वर्मा
उत्तर: (B) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
2. ‘हरिऔध’ जी की कौन-सी रचना खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य मानी जाती है?
  1. साकेत
  2. प्रियप्रवास
  3. कामायनी
  4. वैदेही वनवास
उत्तर: (B) प्रियप्रवास — खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य।
3. कविता में फूल और काँटा कहाँ उगते हैं?
  1. अलग-अलग पौधों पर
  2. एक ही पौधे / डाली पर
  3. जमीन में
  4. पानी में
उत्तर: (B) एक ही पौधे पर — एक ही जड़ से पोषण पाते हैं।
4. काँटे का स्वभाव कैसा है?
  1. कोमल एवं परोपकारी
  2. घमंडी एवं कष्ट देने वाला
  3. सुगंधित
  4. दयालु
उत्तर: (B) घमंडी, कठोर एवं दूसरों को कष्ट देने वाला।
5. फूल का स्वभाव कैसा है?
  1. कठोर
  2. कोमल, सुगंधित एवं परोपकारी
  3. दुष्ट
  4. स्वार्थी
उत्तर: (B) कोमल, सुगंधित एवं परोपकारी — सबको आनंद देने वाला।
6. कविता में काँटा किसका प्रतीक है?
  1. सज्जन
  2. दुर्जन / दुष्ट व्यक्ति
  3. देवता
  4. राजा
उत्तर: (B) दुर्जन — घमंडी और दूसरों को कष्ट देने वाला व्यक्ति।
7. कविता में फूल किसका प्रतीक है?
  1. दुर्जन
  2. सज्जन / विनम्र, परोपकारी व्यक्ति
  3. शत्रु
  4. आलसी
उत्तर: (B) सज्जन — विनम्र एवं परोपकारी व्यक्ति।
8. फूल को कहाँ सम्मान मिलता है?
  1. कूड़े में
  2. देवताओं पर चढ़कर एवं माला बनकर
  3. केवल जमीन पर
  4. कहीं नहीं
उत्तर: (B) देवताओं पर चढ़कर तथा माला बनकर सम्मान पाता है।
9. कविता के अनुसार व्यक्ति का बड़प्पन किससे तय होता है?
  1. ऊँचे कुल या जन्म से
  2. अच्छे कर्मों एवं स्वभाव से
  3. धन से
  4. ऊँचे स्थान से
उत्तर: (B) अच्छे कर्मों एवं मधुर स्वभाव से।
10. “परोपकार” शब्द का अर्थ है —
  1. दूसरों को कष्ट देना
  2. दूसरों की भलाई करना
  3. धन कमाना
  4. घमंड करना
उत्तर: (B) दूसरों की भलाई करना।
11. दोनों को समान रूप से क्या मिलता है?
  1. केवल धूप
  2. एक ही जड़, माली, हवा, चाँदनी एवं ओस
  3. कुछ भी नहीं
  4. अलग-अलग पोषण
उत्तर: (B) एक ही जड़, माली, हवा, चाँदनी एवं ओस — समान परिस्थिति।
12. कविता किस प्रकार की रचना है?
  1. हास्य कविता
  2. नीति-प्रधान / उपदेशात्मक कविता
  3. शृंगार कविता
  4. वीर रस की कविता
उत्तर: (B) नीति-प्रधान एवं उपदेशात्मक कविता।
13. “तिरस्कार” का अर्थ है —
  1. सम्मान
  2. अनादर / उपेक्षा
  3. प्रेम
  4. दान
उत्तर: (B) अनादर / उपेक्षा।
14. कविता का प्रमुख काव्य-गुण क्या है?
  1. केवल वर्णन
  2. प्रतीकात्मकता एवं तुलना
  3. केवल हास्य
  4. भय
उत्तर: (B) प्रतीकात्मकता एवं दो विपरीत स्वभावों की तुलना।
15. कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
  1. काँटे जैसा बनना चाहिए
  2. फूल की तरह विनम्र एवं परोपकारी बनना चाहिए
  3. घमंड करना चाहिए
  4. दूसरों को कष्ट देना चाहिए
उत्तर: (B) फूल की तरह विनम्र, कोमल एवं परोपकारी बनना चाहिए।
महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. “फूल और काँटा” कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)
उत्तर: इस कविता में कवि फूल और काँटे के प्रतीक से जीवन का गहरा संदेश देते हैं। दोनों एक ही पौधे पर उगते हैं, एक ही जड़ से पोषण पाते हैं, एक ही माली उनकी देखभाल करता है और एक जैसी धूप, हवा, चाँदनी मिलती है। फिर भी काँटा घमंडी एवं कष्ट देने वाला है, जबकि फूल कोमल, सुगंधित एवं परोपकारी है। इसी कारण फूल को सब प्यार करते हैं और काँटे से दूर रहते हैं। कवि का संदेश है कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके जन्म या ऊँचे स्थान से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्मों और मधुर स्वभाव से तय होता है।
Q2. कविता में प्रयुक्त प्रतीकों को समझाइए। (3 अंक)
उत्तर: कविता में फूल सज्जन (विनम्र एवं परोपकारी व्यक्ति) का तथा काँटा दुर्जन (घमंडी एवं दूसरों को कष्ट देने वाले व्यक्ति) का प्रतीक है। एक ही पौधा एवं जड़ समान परिस्थिति एवं पालन-पोषण का प्रतीक है, जबकि फूल की सुगंध अच्छे गुणों और परोपकार का प्रतीक है। इन प्रतीकों से कवि जीवन-मूल्य की शिक्षा देते हैं।
Q3. इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है? (3 अंक)
उत्तर: कविता से शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को घमंडी एवं कठोर (काँटे जैसा) न बनकर, विनम्र, कोमल एवं परोपकारी (फूल जैसा) बनना चाहिए। बड़प्पन ऊँचे कुल या स्थान से नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों और मधुर स्वभाव से आता है। अपने सद्गुणों से ही व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है।
Q4. कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए। (3 अंक)
उत्तर: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) खड़ी बोली के प्रमुख कवि थे। उनका जन्म निज़ामाबाद (आज़मगढ़) में हुआ। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘प्रियप्रवास’ खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य मानी जाती है। अन्य रचनाओं में वैदेही वनवास, चोखे चौपदे प्रमुख हैं। उनकी कविताओं में नीति, उपदेश एवं जीवन-मूल्यों की शिक्षा मिलती है।
Q5. “एक ही परिस्थिति में रहकर भी व्यक्ति अपने स्वभाव से भिन्न होता है” — कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (4 अंक)
उत्तर: कविता में फूल और काँटा एक ही पौधे पर, एक ही जड़ से, एक जैसी धूप-हवा-चाँदनी पाकर उगते हैं — अर्थात् दोनों की परिस्थिति बिल्कुल समान है। फिर भी काँटा कठोर एवं कष्ट देने वाला बन जाता है, जबकि फूल कोमल एवं परोपकारी। इससे सिद्ध होता है कि व्यक्ति का चरित्र केवल परिस्थिति से नहीं, बल्कि उसके अपने स्वभाव एवं कर्मों से बनता है। इसलिए हमें अच्छे गुण अपनाकर फूल जैसा बनना चाहिए।
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