सारांश
यह पाठ कवि गिरिधर कविराय की कुंडलिया छंदों का संकलन है। कुंडलिया नीति पर आधारित दोहे और रोला के मेल से बना छंद होता है। इन कुंडलियों में जीवन जीने की व्यावहारिक सीख दी गई है। कवि कहते हैं कि बिना सोचे-समझे कोई कार्य नहीं करना चाहिए और कठिन समय के लिए धन एवं साधन बचाकर रखने चाहिए। इन रचनाओं में सरल भाषा में गहरी नीति की बातें कही गई हैं, जो आज भी हमारे जीवन में उपयोगी हैं।
मुख्य बिंदु
- गिरिधर कविराय की नीतिपरक कुंडलियाँ।
- कुंडलिया छंद का परिचय।
- सोच-समझकर कार्य करने की सीख।
- विपत्ति के लिए संचय का महत्व।
महत्वपूर्ण प्रश्न
- कुंडलिया छंद क्या होता है?
- कवि किस बात के लिए सावधान करते हैं?
- इन कुंडलियों से क्या शिक्षा मिलती है?
शब्दार्थ
कुंडलिया = एक छंद, नीति = सही मार्ग, संचय = बचत, विपत्ति = मुसीबत।
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