मीरा के पद

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CLASS VII Hindi Ch 10 of 10
मीरा के पद

Class 7 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

सारांश

ये पद भक्त कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित हैं। मीराबाई भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। इन पदों में उन्होंने अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अटूट भक्ति और प्रेम को व्यक्त किया है। मीरा सांसारिक सुखों को त्यागकर पूरी तरह कृष्ण भक्ति में लीन रहती हैं। वे कृष्ण को ही अपना सर्वस्व मानती हैं। उनके पदों में सरल भाषा, मधुर भाव और गहरी श्रद्धा का अद्भुत मेल है। ये पद भक्ति काल की उत्कृष्ट रचनाएँ मानी जाती हैं और आज भी श्रद्धा से गाए जाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • मीराबाई की कृष्ण भक्ति का चित्रण।
  • सांसारिक सुखों का त्याग।
  • सरल भाषा और मधुर भाव।
  • भक्ति काल की उत्कृष्ट रचना।

महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. मीराबाई किसकी भक्त थीं?
  2. इन पदों में किस भाव की प्रधानता है?
  3. मीरा के पदों की भाषा कैसी है?

शब्दार्थ

पद = भक्ति गीत, अनन्य = एकमात्र, आराध्य = पूज्य, सर्वस्व = सब कुछ।

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